जज़्बात मेरे दिल के बेईमान हो रहे हैं कुछ ख़्वाब उल्फ़तों में मेहमान हो रहे हैं तेरी आँखों के इशारे, रुख़सार पे शरारे बचपन के दिन हों जैसे नादान हो रहे हैं अब कहकशाँ भी मेरी और चाँद भी है मेरा बद नसीबी के सितारे अंजान हो रहे हैं काबिज़ है दिल पे मेरे तेरा प्यार और मुहब्बत मंज़र भी नफ़रतों के सुनसान हो रहे हैं
जज़्बात मेरे दिल के बेईमान हो रहे हैं कुछ ख़्वाब उल्फ़तों में मेहमान हो रहे हैं तेरी आँखों के इशारे, रुख़सार पे शरारे बचपन के दिन हों जैसे नादान हो रहे हैं अब कहकशाँ भी मेरी और चाँद भी है मेरा बद नसीबी के सितारे अंजान हो रहे हैं काबिज़ है दिल पे मेरे तेरा प्यार और मुहब्बत मंज़र भी नफ़रतों के सुनसान हो रहे हैं
जज़्बात मेरे दिल के बेईमान हो रहे हैं कुछ ख़्वाब उल्फ़तों में मेहमान हो रहे हैं तेरी आँखों के इशारे, रुख़सार पे शरारे बचपन के दिन हों जैसे नादान हो रहे हैं अब कहकशाँ भी मेरी और चाँद भी है मेरा बद नसीबी के सितारे अंजान हो रहे हैं काबिज़ है दिल पे मेरे तेरा प्यार और मुहब्बत मंज़र भी नफ़रतों के सुनसान हो रहे हैं
कॉलेज का ज़माना भी, किस क़दर सुहाना था । वो मेरी दीवानी थी ,मैं उसका दीवाना था । सब देखते थे उसको, वो देखती थी मुझको । था तीर-ए-नज़र उसका ,और दिल ये...
कोई भी कुछ भी कह, के चला जाता है हमे लगता है हम भी ज़्यादा शराफ़त में आ गए आवाज़ आपने दी तो हरकत में आ गए दस्त ए अदब को जोड़ के ,ख़िदमत में आ गए ...
इस मुसीबत से बचाओ भगवन, फिर किसी रूप में आओ भगवन। कितना ढायेगी सितम ये कुदरत रोक अब इस पे लगाओ भगवन । सबकी आँखों में हैं ग़म के आँसू , सबके ग़म...
Phool Rasmon Ki Khatir Nahi Laiye Phool Khil Jayenge Aap Aa Jaiye Phool Khil Jayenge Aap Aa Jaiye Phool Rasmon Ki Khatir Nahi Laiye Phool Khil Jay...
मोहब्बत की लड़ाई है, जो होगा देखा जाएगा तबीयत तुम पे आई है, जो होगा देखा जाएगा यहां तैयार बैठा है जो मेरी जान लेने को उसी पर जा ये आई है, जो होगा...
इश्क़ तेरा मुझे सूफ़ियाना लगा मिलके तुझसे ये मौसम सुहाना लगा । क्या वो आये है जो इसमें गुल खिल गए आज दिल का चमन आशिक़ाना लगा । ख़त तुम्हारा मिला ...
क़त्ल करके भी वो कहते हैं हुआ कुछ भी नहीं। ऐसे मासूँम गुनाहों की सज़ा कुछ भी नहीं। ज़ुल्फ़ लहराते ही मौसम ने खोल दीं बाहें, क्या हुआ होश को फिर हो...
ऐ कमसिन हसीना जरा तुम ठहरना न खतरों से खाली तेरा यों सँवरना बहुत इश्क़िया हैं ये राहें शहर की नक़ाबों में रहकर यहां से गुज़रना कहाँ तक चलोगे अकेले ...
जब कलाई में उनके सजी चूड़ियाँ और भी ख़ूबसूरत लगी चूड़ियाँ । वो यहाँ पर छुपी है, खनक कर कहा कर रही है मेरी रहबरी चूड़ियाँ बुझ गए सब दिये पर अंधेरा ...